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जवालामुखी स्तुति, कवि: चन्द वरदाई








दोहा



चिंता विघन विनाषनी, कमलासनी शकत्त

वीसहथी हॅस वाहनी, माता देहु सुमत्त।



छन्द भुजंगप्रयात



नमो आदि अन्नादि तूंही भवानी

तुंही जोगमाया तूंही बाक बानी

तुंही धर्नि आकाष विभो पसारे

तुंही मोह माया बिखे षूल धारे । 1।



तुंही चार वेदं खटं भाष चिन्ही

तुंही ज्ञान विज्ञाान मेे सर्व भीनी

तुंही वेद विद्या चऊदे प्रकाषी

कला मंड चोवीस की रूप राषी। 2।



तुंही रागनी राग वेदं पुराणम

तुंही जन्त्र मे मन्त्र में सर्व जाणम

तुंही चन्द्र मे सूर्य मे एक भासै

तुंही तेज में पुंज मेेे श्री प्रकाषै । 3।



तुंही सोखनी पोखनी तीन लोकं

तुंही जागनी सोवनी दूर दोखं

तुंही धर्मनी कर्मनी जोगमाया

तुंही खेचरी भूचरी वज्रकाया । 4।



तुंही रिद्धि की सिद्धि की एक दाता

तुंही जोगिनी भोगिनी हो विधाता

तुंही चार खानी तुंही चार वाणाी

तुंही आतमा पंच भूतं प्रमाणी । 5।





तुंही सात द्वीपं नवे खंड मंडी

तुंही घाट ओघाट ब्रह्मंड डंडी

तुंही धर्नि आकाष तूं बेद बानी

तुंही नित्य नौजोवना हो भवानी । 6।



तुंही उद्र में लोक तीनॅू उपावे

तुंही छन्न में खान पानं खपावे

तुंही अेक अन्नेक माया उपावे

तुंही ब्रह्म भुतेष विष्णु कहावे । 7।



तूही मात हो एक ज्योती स्वरूपं

तुंही काल महाकाल माया विरूपं

तुंही हो ररंकार ओंकार बाणी

तुंही स्थवरं जंगमं पोख प्राणी ।8।



तुंही तूं तुंही तूं तुंही एक चण्डी

हरी ष्षंकरी ब्रह्म भासे अखण्डी

तुंही कच्छ रूपं उदद्धी बिलोही

तुंही मोहिनी देव दैतां विमोही।9।



तुंही देह वाराह देवी उपाई

तुंही ले धरा थंभ दाढां उठाई

तंुही विप्रहू में सुरापान टार्यो

तुंही काल बाजी रची दैत मार्यो। 10।



तुंही भारजा इंद्र को मान मार्यो

तुंही जाय के भ्रग्गु को गर्व गार्यो

तुंही काम कल्ला विखे प्रेम भीनी

तुंही देव-दैतां दमी जीत दीनी ।11।



तुंही जागती जोति निंद्रा न लेवे

तुंही जीत देनी सदा देव सेवे

अजोनी न जोनी उसासी न सासी

न बैठी न ऊभी न पोढ़ी प्रकासी ।12।

न जागे न सोवे न हाले न डोले

गुपन्ति न छत्ति करंति किलोले

भुजालं विषालं उजालं भवानी

कृपालं त्रिकालं करालं दिवानी ।13।

उदानं अपानं अछेही न छेही

न माता न ताता न भ्राता सनेही

विदेही न देही न रूपा न रेखी

न माया न काया न छाया विषेखी । 14।



उदासी न आसी निवासी न मंडी

सरूपा विरूपा न रूपा सुचंडी

कमखा न संखा असंखा कहानी

हरींकार ष्षब्दं निरंकार बानी । 15।



नवोढा न प्रौढा न मुग्धा न बाली

करोधा विरोधा निरोधा कृपाली

अभंगा न अंगा त्रिभंगा न जानी

अनंगा न अंगा सुरंगा पिछानी ।16।



षिखर पै फुहारो असो रूप तोरो

अजोनी सुपावांे कटे फंद मोरो

पढ़े चंद छन्दं अभै दान पाऊं

निषां वासरं मात दुर्गे सुध्याऊं ।17।



सुनी साधकी टेर धाओ भवानी

गजं डूबते वार ब्रजराज जानी

भजे खेचरी भूचरी भूत प्रेतं

भजे डाकनी षाकनी छोड़ खेतं ।18।



पढे़ जीत देनी सबै दैत नाषं

भजे किंकरी ष्षंकरी काल पाषं

भजे तोतला जंत्र मंत्रं बिरोले

भजे नारसिंगी बली बीर डोले ।19।



निषा वासरं ष्षक्ति को ध्यान धारे

सु नैनं करी नित्य दोषं निवारे

करी वीनती प्रेमसो भाट चंदं

पढ़ंते सुनंते मिटे काल फंदं ।20।



तुंही आदि अन्नदि की एक माया

सबे पिण्ड ब्रह्मांड तुंही उपाया

तुंही बीर बावन्न वंदे सुभारी

तुंही वाहनी हंस देवी हमारी ।21।



तुंही पंच तत्वं धरी देह तारी

तुंही गेह गेहं भई ष्षील वारी

तंुही ष्षैलजा श्री सावित्री सरूपी

तुंही षिव विष्णू अजं थीर थप्पी ।22।



तुंही पान कुंभं मधुपान करनी

तुंही दुष्ट घातीन के प्रान हरनी

तुंही जीव तूं षिव तूं रीत भर्नी

तुंही अंतरीखं तुंही चीर धर्नी।23।



तुंही वेद में जीव रूपं कहावे

निराधर आधार संसार गावे

तुंही त्रीगुनी तेज माया लुभानी

तुंही पंच भूतं नमस्ते भवानी ।24।



नमोड़कार रूपे कल्यानी कमल्ला

कलारूपं तूं कामदा तूं विमल्ला

कुमारी करूणा कमंख्या कराली

जया विजया भद्रकाली किंकाली ।25।



षिवा ष्षंकरी विष्व विमोहनीयं

वराही चामुण्डा द्रुगा जोगनीयं

महालच्छमी मंगला रत्त अख्खी

महा तेज अंबार जालंद्र मख्खी ।26।



तुंही गंग गोदावरी गोमतीयं

तुंही नर्मदा जम्मना सर्सतीयं

तुंही कोटि सूरज्ज तेजं प्रकाषी

तुंही कोटि चंदाननं जोत भासी ।27।



तुंही काटिधा विष्व आकाष धारे

तुंही कोटि सुमेरू छाया अपारे

तुंही कोटि दावानलं ज्वालमाला

तुंही कोटि भयभीत रूपं कराला ।28।





तंुही कोटि श्रृंगार लावण्यकारी

तुंही राधिका रूप रीझे मुरारी

तुंही विष्व कर्ता तुंही विष्व हर्ता

तुंही स्थावंर जंगमं में प्रवर्ता ।29।



द्रुगामां दरीजन्न वंदे न आयं

जपे जाप जालंदरी तो सहायं

नमस्ते नमस्ते सु जालेन्द्र रानी

सुरं आसुरं नाग पूजंत प्रानी ।30।



नमोअंकार रूपे सु आपे बिराजे

क्लंींअंकार हृींकार आंेकार छाजे

ओहंकार देवी सोहंकार भासं

श्रियंकार हूंकार त्रींकार वासं ।31।



तुंही पातकी नाषनी नारसींगी

तुंही जोगमाया अनेका संुरगी

तुंही तूं ज जाने सु तोरो चरीतं

कहां में लखों चंद तोरी सुक्रीतं ।32।



अपारं अनंतं जुगं रूप जानी

नमस्ते नमस्ते नमस्ते भवानी

नमो ज्वाला ज्वालामुखी तोहि ध्यावे

अबे सिघ्र वरदान को चंद पावे ।33।



कहांलो बखानूं लघू बुद्धी मेरी

पतंगी कहा सूर साम्हे उजेरी

रती है तुम्हारी मती है तुम्हारी

चिती है तुम्हारी गती है तुम्हारी ।34।



जुगं हाथ जोरी कहे चंद छंदं

हरो भक्त के दुःख आनंदकंदं

हिये में बिरजो करो आप बानी

नमस्ते नमस्ते नमस्ते भवानी ।35।



दोहा

करि विनती यूं बंदिजन, सनमुख रही सुजान

प्रकट अम्बिका यूं कहृाो, मांग चंद वरदान ।

चाळकनेची चामुंडा दोहा, छंद, छप्पय , कवि: हमीरजी चारण, कच्छ, सौराष्ट्र



दोहा

गंगा गया काशी गया, पावन किया निपाइ
जग अभया विजया जया, अमया खमया आइ।

वीमळा कमळा वीजळा, चख भूंभळा सुचंग
महिला अकळा मंगळा, सकळ कळा शिवसंग।

अवरी अमरी अपशरी, शीकोतरी शकत
आशापुरी अगोचरी, माहेशरी महत्त।

जगहरणी करणी जगत, सुर सामण सुभेद
अशरण शरणी अपरणी, वे वरणी चत्रवेद।

छंद त्रिभंगी

वेदां वचाणी पढे पुराणी, क्रोड़ विनाणी कतियांणी
के काम कामांणी अकह कहांणी, जय सुररांणी जगजांणी
भाखे ब्रह्मंणी तू मन भांणी, अविरल वांणी ऊदंडा
रवराय रवेची मुहमाडेची, चाळकनेची चामुंडा। 1।

आसापुरा आई देव दुगाई महण मथाई मंहमाई
सतसील सदाई जुध जेताई, गाढ वढाई गरवाई
दैतां दुःखदाई सुरां सहाई, खिती उपाई नवखंडा
रवराय रवेची मुहमाडेची, चाळकनेची चामुंडा। 2।

सेवे ब्रह्मत्ती जत्ती सत्ती, आद सगत्ती अवगत्ति
पावन प्रकत्ती वेद वकत्ति, तूं सुरसत्ती त्रिसगत्ति
मंहमाय मुरत्ती उत्तम अत्ती, सत्ती पत्ति पतसंुडा
रवराय रवेची मुहमाडेची, चाळकनेची चामुंडा। 3।

सुंदर हंसलाळी सदासुखाळी, रम्मतियाळी रतियाळी
कोयला गिरवाळी घरण कमाळी, बूढ़ी बाळी, बिरदाळी
त्रिपुराचर ताळी मन मछराळी, पाप प्रजाळी परचंडा
रवराय रवेची मुहमाडेची, चाळकनेची चामुंडा। 4।
केहरी असवारी अकन कुंवारी, मास अहारी मेवारी
धन पुहच तुहारी अज अवतारी, तू भवनारी भवतारी
पीयण रत पाडा मारण जाडा, अहर अराडा अरिथंडा
रवराय रवेची मुहमाडेची, चाळकनेची चामुंडा। 5।

माता मातंगी उत्तम अंगी, बाण सुचंगी वेदंगी
त्रिचख अरथंगी लहर तरंगी, निज भेदंगी नादंगी
निहकळ निकळंगी रिध सिध रंगी, अजा उमंगी ऊदंडा
रवराय रवेची मुहमाडेची, चाळकनेची चामुंडा। 6।

वीरां रा टोळां साथ सबोळां, झूल झकोलां रमझोळा
धूपां ढगसोळां नित्त उधोळाख् होय किलोळा हींगोळा
जोगण खेखट्टा रूप विकट्टा, खेल झपट्टा खळखंडा
रवराय रवेची मुहमाडेची, चाळकनेची चामुंडा। 7।

उतरे आकासं विवरे वासं, वळे विलासं कवलासं
वडवडज्ञ तामसं हास हुलासं, जोत प्रकासं ऊजासं
जग व्यापक जोई कळे न कोई, पारन होई पाखंडा
रवराय रवेची मुहमाडेची, चाळकनेची चामुंडा। 8।

छप्पय
चालराय चामुंडा, माड मांडण महमाया
चरताली चंडिका कालिका कायम काया
नवनेता भवनारि, नवे दुर्गा नव निद्वी
इम हमीर उच्चरे, शरम राखे हरसिद्धी
सावित्री गौरि लखमी शकति, गुण रजतमो सतोगुणी
वीस हथी धन्यधारी वडम, जय जालंपा जोगणी।

देवी वन्दना, कवी: श्री हिंगलाजदानजी कविया, सेवापुरा




छन्द भुजंग प्रयात

भवानी नमो स्वच्छ श्रृगंर अंगा
भवानी नमो सुन्दरी शिम्भु संगा
भवानी नमो कासरिद्रारि हन्ता 
भवानी नमो आसि आभा अनन्ता।1।

भवानी नमो ब्रह्मजा बुद्धि धामा 
भवानी नमो शुम्ब संहारि स्यामा 
भवानी नमो भूत कैलासवासी
भवानी नमो ओज अम्भोज आसी।2।

भवानी नमो तारनी बारि द्रोनी
भवानी नमो मत्र मातंग गोनी
भवानी नमो ईशता दान दाता 
भवानी नमो रूद्र रानी विख्याता।3।

भवानी नमो रागकंजात नैनी
भवानी नमो दानवाॅ दण्ड दैनी
भवानी नमो चण्ड के प्रान हानी 
भवानी नमो सिन्धुजा राजरानी।4।

भवानी नमो दच्छ लोकेश छोनी 
भवानी नमो जोग निद्रा अजोनी 
भवानी नमो जोगनी जुथ्थ सथ्थी
भवानी नमो भैरवी बीसहथ्थी।5।

भवानी नमो जोति ज्वाला अखंडी
भवानी नमो चंचला रूप चंडी
भवानी नमो ब्रह्मनी ब्रह्म बामा
भवानी नमो मैथली राम रामा ।6।

भवानी नमो नित्य षोभा नवीनी 
भवानी नमो भीम तें प्रेम भीनी
भवानी नमो मुंडहा मान मत्ती
भवानी नमो राधिका कान्ह रत्ती।7।

भवानी नमो मेदनी भार भंगा
भवानी नमो भारती नील रंगा
भवानी नमो नागबेधी अरोहा
भवानी नमो दैत्य संदोह द्रोहा।8।

भवानी नमो कच्छपी स्वान भासा
भवानी नमो ऐन ईषान असा
भवानी नमो ब्योम गंगा बलच्छा
भवानी नमो चेतना देन दच्छा।9।

भवानी नमो धारनी शूल धारा
भवानी नमो तेज संघात तारा
भवानी नमो मोहनी मुंडमाली
भवानी नमो काल क्रव्याद काली।10।

भवानी नमो सत्य आलाप बाला
भवानी नमो वृन्द विद्या विषाला
भवानी नमो देव हेरम्भ माता 
भवानी नमो तन्नमो सन्त त्राता।11।
*****

दुर्गा-बहत्तरी, कवि: हिंगलाजदानजी कविया, सेवापुरा





छन्द भुजंगप्रयात

मनंछा परब्रह्म हिंगोळ माता 
समै सात पोरांॅं रमै दीप साता 
जॅबू दीप मे जाम एको जिकांॅरो
दिसा पच्छमी दूर प्रासाद द्वारो।1।

जिको धोकबा काज जावै जमाताॅ 
अपा पाप थावै बजै सिद्ध आतांॅ
करामात री बात साखात कैई
सता मात री चन्द्रकूपादि सैई।2।

नग्री सोनमेनी पछै गाॅम नाॅही 
महा कासटा घोर ऊजाड़ माॅही
प्रपा कूप नैड़ो न बैड़ो पयाणों
जलाल्या तणों फेटबो थेट जाणों।3।

बहै जातरी रातरी दीह बारा
धकै चाढ़बो माग रो खाग धारा
उदै-अद्र जो बारमों भाॅण ऊगै
पबै-अस्त सो पूगियां नीठ पूगै।4।

तठै आगवो खाग हूॅ छाग तोड़ै
चॅडी काळिका मात रै श्रोण चैड़ै
लगावै सबै ष्षेष बिन्दी ललाटाॅ
करै फेर विश्राम पाखै कपाटाॅ ।5।

उठै झाड़ कण्डीर पाहाड़ अैंडा
बणैं मंथराॅ हालणों पंथ बैंडा
खळक्कै सदा नीझराॅ नीर खोळाॅ
छलै कुण्ड अल्लील सल्लील छोळाॅ।6।

कैई जातरा तत्र पत्राळ कूॅजै
गहक्कै सिवा साद सादूळ गूॅजै
जिकां दाकले जातरी पोढ़ जावै
गुसाई रहै जागता राग गावै।7।
बडै प्रात श्रीमात मंजीर बागै
जराॅ गात जम्मात जम्मात जागै
सुणीजै अलंकार झंकार श्रुताॅं 
हुवै नींद बिक्षेप ताकीद हूॅंताॅ।8।

बिजै मात री जातरी लोक बोलै
खम्मा बैण उचारता नैंण खोलेै
पुगावै गुफा-गर्भ पाखै पुजारा
दुजन्मा जमाताॅ हुवै जेण द्वारा। 9।

नवो जन्म ले कुण्ड कण्डीर न्हावै
महासुद्ध व्है मुद्ध मां नूॅ नमावै
लखै सूळ सिन्दूर रो झोक लेतो
श्रज्यो मात श्रीहाथ त्रिनोक सेतो।10।

धनो धन्य सो लोक जो नोक धोकै
बळे गोर हूॅ और बातां बिलाकै 
रच्या राम रा दोय चित्राम रूड़ा
चखाॅ-सर्व एको बियो सर्व- चूड़ा।11।

गदा ले खड़ो लाॅगड़ो अग्रगामी 
भले मात हिंगोळ हिंगोळ भाॅमी
मुणीं मैं जिको आदि अन्नादि माई
अवतार ले माॅमड़ा धाम आई।12।

थिरा आवड़ा नाम विख्यात थायो
छिपा-सत्रु सो तेमड़ै छत्र छायो
सको सोखियो हाकड़ो नाम सिन्धू
बहन्तो थको रोकियो लोकबन्धू।13।

चक्री पीवणों पाय भाई बचायो
क्षुधाळी हणै. हेक हेरंब खायो
चढ़ीज्यो धकै तेमड़ो सुक्र चैळो 
भुजाॅ झोक कीधो पित्रांलोक भेळो।14।

लंबी कोस कैई गुफा खोस लीधी 
करे पोस पासाॅण निर्दोष कीधी
जठै आवड़ा मामड़ाई पुजावै
आई धोकबा लोक अन्नेक आवै।15।

रच्यो फेर प्रासाद बाहादरा रो
धनो भाग भू भाग भाटी धरारो
हुवो ना इसो थाॅन ना आन हूॅणों
दिपै इन्दराॅ मन्दिराॅ हूॅता दूॅणों।16।

ढ़की नींव काकोदराॅ लोक दूकै
फतै चिन्ह आकास लागो फरूकै
मिणै मेह रो माग पाताळ मानॅू 
सको देहरो सेहरो रत्नानूॅ।17।

थिरू मूरती सूर रै नूर थाई 
तिका स्वप्न रै माॅही पिण्डाॅ बताई 
सिरोरूह कोसेय काळा सरीखा
तियो आॅक भॅ बाॅकड़ा नेत तीखा।18।

झगै भाळ सिन्दुर ज्यांे ज्वाळा झाळा
मुद्राळी गळै हिण्डुळै मुण्ड माळा
भुजाॅ भाॅमणाॅ कंकणाॅ सज्ज कीधां 
लसै सूळ डैरू खड्ग खप्र लीधाॅ।19।

छऊ भैंन छोटी दहूॅ ओड. छाजै
बिचै पाट-राजीव माजी बिराजै
खड़ो लाॅगाड़ो बीर वीराधि खेतू
करै रागड़ाॅ छागड़ाॅ राह केतू।20।

खळाॅ धूकळाॅ आदरै बीर खेळा
मिलै बाधरै जोगण्या जुत्थ मेळा
भरै पत्र भैसाॅ अजाॅ रत्र भोगै
अछक्काॅ छकाॅ छाक दारू अरोगै।21।

हुवै धत्त लोहित्त मैमत्त हाला
नसारा किसा पार सुळाॅ निवाला
मधू मास आसोज मे रास मडै
तिहूॅ लोक री डोकरी तेथि तडै।22।

रजा बह्म री रूप अन्नेक रम्मै
घणॅा बाजणाॅ घूघराॅ घम्म घम्मै
घटा भद्द ज्यों नद्द आॅनद्ध घोरै
धुबै ताळ कंसाळा संाॅगीत धोरै।23।

तणै तार सैतार बीणादि तन्त्री
बणै बीस बत्तीस भैरूं बजन्त्री
डफाॅ मादळाॅ नाद डैरूॅ डमंकै
धरा ब्योम पाताळ धूजै धमंकै।24।

धनो धन्य मां आवड़ा धाड़धाड़ा
अखीजैं किसी जीह थारा अखाड़ा
सदा तू रमै रास नो कोड़ साथै 
महामोड़ तू कोड़ तेंतीस माथै।25।

जिका आवड़ा देस जेसाण जिल्लै 
करन्नी तिका दं्रग देसाण किल्लै
मयन्दी बणे कान्हरै थाप मारी
तरी साह तोफाॅन रै माॅह तारी।26।

बिलूॅब्यो निधी नीर श्री हाथ बामै
पुरी में सको सीर हन्नोज पाॅमैं
सजा हॅू छुड़ायो आई राव सेखो
लाई पुत्र पित्रेस रो लोप लेखो।27।

चवत्थू तणांे तूटियो ऊॅट चीन्हो
करे काठ रो पाॅव उपाव कीन्हों 
दिपी कूप रै ऊपरै रूप दम्भी 
थये टूकड़ा जावती लाव थम्भी।28।

महाराज नॅू राज रीझे समाप्यो 
थिरू राज रो राज देसाण थाप्यो
जठै झाड़ियाॅ खंड श्रीखण्ड जैड़ी 
नगां पुंजरी मंजरी रूप नैड़ी।29।

हिन्दूवाण रो घ्राण देसाण हूगो
वणाॅरो अलंकार प्राकार ऊगो 
बुरज्जाॅ चहूॅ जाॅण लोकेष बाका 
प्रथी आभ रै बीच भाॅगै पताका। 30।

पड़ै दीठ आसेर ज्यों मेर पब्बै
दूती देखियाॅ स्वर्ग रो दुर्ग दब्बै
सिला रा किला द्वार चित्राम सोहै
बिभूसा अलोकीक लोकाॅॅ बिमोहै।31।

कपाटाॅ तणीं गाढ़ता बज्र कीसी 
बणी भालि ज्यांे जज्र बाकै बतीसी
कसै ब्याळ हूॅ नींव पाताळ काॅनै
महा उच्चता भाखराॅ तुख्छ माॅनै।32।

तिसोता जिसो नीर गम्भीर टाॅको
बिलूंमै बिचै जाळ भुज्जाळ बाॅको
जिका कोट नूॅ देवता हाथ जोड़ै
चहुॅ कूॅट रै बीच बैकूॅट चोडै़। 33।

छबीलो घणों खास आवास छाजै 
लखे घाट स्वाराट रो पाट लाजै
निराळै फबै फूटरो झूॅठ नाॅही
मनांे मेर रो कूट बैकूॅट माॅही।34।

लखीजै असी भाॅति आकास लागो
भवानी खड़ा पाॅण लीधाॅ त्रभागे 
हमेसा रहै सत्रु रो सीस हाथै
मुखै रत्र रो तासळो छत्र माथै। 35।

दिपै आवड़ा आद प्रासाद दूजा 
पुजारा करै नित्य नैमित्य पूजा 
चवे चंडिका चंडिका दीप चासै
पिसै ठीक बाल्हीक श्रीखंड पासै ।36।

सिरी गंग रो नीर सन्नान सारू 
दसत्तूर सिन्दुर कप्पूर दारू
हुवै होम आसावरी धूप हूॅमैं
घणाॅ साॅघणाॅ दीप साॅमीप घॅमैं ।37।

फलाॅ गंज फूलाॅ दळाॅ पुंज फाबै
तयारी रहै सासता दास ताबै 
दहूॅ हाथ जोड्याॅ पढ़ै छंद दोहा 
बढ़ै मैंमदादीक सोरंभ बोहा।38।

श्रलोकाॅ धुणी पाठ दुर्गा सुणावै
गुणी माढ़ रै राग सौभाग गावै
बॅबी वीण सैतार सैनाय बाजै 
त्रमाळा घुरै मेघमाळा तराजै।39।

जुड़ै आय सव्वासण्याॅ रायजादी
दरस्सै कैई सेवकाॅ माय दादी
हमल्लै धनो उन्दरी सेन हंद
मनों मैथली बन्दरी सेन बंद। 40।

हुवै चम्मराॅ झाटका जोति हूबै 
सदा ऊतरै आरती सांझ सूबै 
तके भादवी माह ऊपान्त तित्थी
पड़ै माय रै पाॅय पृत्थीप पृत्थी।41।

पुनै चैत आसोज रा स्वेत पाखाॅ
लुळै मात नूॅ जातरी लोक लाखाॅ 
बदीजै किसॅू कीरती हेक बाकै
थळी री दुती दाखतो सेस थाकै।42।

प्रवाड़ा किसूॅ हेक जीहा पुणीजै
कराॅ जोडियाॅ कोड़ि आदेस कीजै
धजाळी हमै फेर औतार धार्यो
बडो काम श्री जोगमाया विचार्यो।43।

अभै दान जेसाॅण बीकाॅण अप्पै
तिका आज जोधाॅण रै राज तप्पै
आई आवड़ा नाम बिख्यात येळा
बजै इन्द्रबाई जिका येण बेळा।44।

नमो देस मारू धरा कोट नोवाॅ
नमो दं्रग गेढ़ा कलाॅ खुर्द दोवाॅ
प्रणम्मो समों च्यार छै नो पहोमी
नमो मास आसाढ़ री शुक्ल नोमी।45।

नमो सुक्र सन्ध्या घणो श्रेष्ट सम्मो
नखित्राॅ तणों पातिसा स्वाति नम्मो
महालक्षमी मात धापाॅ नमामी 
नमो मात रो तात सामुद्र नामी । 46।

बळे तन्नमो तन्नमो इन्द्रबाई 
तुही सुन्य रै माॅही चैतन्यताई 
महंमाय तूही तुही जोगमाया
प्रकत्ती सकत्ती तुही नाम पाया।47।

तुही रोम में तोम बै्रमंड राखै 
नवै खंड तूही घड़े भाॅगि नाॅखै
रमी तू रहै ब्रह्म रै रोम रोमै 
तरां बिंब छाया रहै ब्रह्म तोमै।48।

प्रथम्मा तुही पब्बई सैल पुत्ती
दुरग्गा तुही ब्रह्म चारण्य दुत्ती
त्रतीया तुही चन्द्र घन्टा तवीजै
चतुर्थी तुही कूसमांडा चवीजै । 49।

मुणीजै तु ही पंचमी स्कंदमाता
खटी मात कात्यायणी तू बिख्याता
रचै सातमो रूप तू काळरात्री
दिगी गोरि तू निध्यमी सिद्धिदात्री।50।

धुराॅ तू सुराॅराय नो नाम धेई 
कहीजै पुनः रावळा रूप कैई 
तुही भीलणीं भैष संभु भुळावै
रजोमूरती लेख तू ही रूळावै।51।

हरीबच्छ श्रीलच्छ तू बीस हत्थी
तुही पन्नगाधीस रै सीस पृृथ्थी
तुही पच्छ तारच्छ मे सीघ्रताई 
रती मूरती में तुही सुन्दराई ।52।
तुही भैष मे सूर मे नूर भासै 
तुही मेह कादम्बणी चत्रमासै
दिपै तू घटा मै छटा द्योतद्वारा
धपै तू जटा मैं तटा गंगधारा। 53।

छती तू सती भूपति दच्छ छोणी
गती मत्त मातंग तू हंस गौणी
तुही चन्द्रमा तुंड चामंुड चंडी
अपर्णा अजा ईस्वरी तू अखंडी। 54।

बिजै तू श्रजै आहवाॅ बाह बीसाॅ
सजै तू हिये हार झूझार सीसाॅ 
तुही हाथ ले शुळ सादूळ हक्कै
त्रणां मात्र तू सुक्र रा छात्र तक्कै। 55।

महैरामणो सुंभ निसुंभ मार्या
बली चंड मुंडादि तुही बिदार्या
दिती पुत्र तू मारियो बाजद्रोही
ललक्कारि डक्कारियो बीजलोही।56।

तुही अज्जया अभ्भया अब्बिळंबा 
तुही साकणी डाकणी बाकसाळी
तुही भूचरी खैचरी भद्रकाळी।57।

तुही जंत्रणी मंत्रणी अंत्रजामा
तुही ध्ंात्रणी तंत्रणी बुद्धिधामा
तुही गिव्वराॅ बिव्वराॅ बीच गाजै
तुही रावळाॅ देवळाॅ मध्य राजै।58।

तुही काळिका ज्वाळिका बज्रकाया 
तुही मंगळा तोतळा जोगमाया
तुही पिंगळा डिंगळा पद्य गद्या
तुही बैदिका लौकिगा छन्द विद्या।59।

तुही भारती भाखणी सर्व भाखा
तुही सर्व दातार मंदार साखा
हमाऊ परां तो कराॅ छाॅह हेको
न को पार ओतार थारा अनेको।60।

तुही सारदा नारदा कासमेरी
तुही काळिका भास मद्रास केरी
कृपाळी तुही किल्लकतै किल्लक्कै
जिलै उत्तराखंड तू ज्वाळा जक्कै । 61।

कुमख्या तुही काॅमरू देस काॅनी 
भळे तत्थ तू मत्थहीणाॅ भवानी
दिसा प्राचि आवाचि तूही उदीची
तुही मात हिंगोळ राजै प्रतीची। 62। 

तुही सिंध आसापुरा रूप तापै
तुही अंबिका मात अैबात आपै
तुही अर्बुदा अद्र आबू अग्राजै
तुही बैचरा संभरा मात बाजै।63।

सिला रूप आमेर तूही सकत्ती 
तुही जीण जम्वाय जोताॅ जकत्ती
तुही जोति ज्वाळामुखी जोबणैरी
बसै तू दिली जोगणी बेख बैरी।64।

तुही कामही नाम देवी कहाॅणी
महंमाय दुगाय तूही मृडाॅणी
तुही चाॅण चामंड चालक्कनेची
तुही राजराजेस्वरी डूंगरेची। 65।

बजै माल्हणाॅ मात तूही बिराई
बळू तू प्रथीराज रै राजबाई
पुनः माय गीगाय तुही पुणीजै
भुजाळी तुही नागणेची भणीजै।66।

सिंघाळी तुही सीमिका होल सैणी
ब्रदाळी तुही गूंगिका नागबैणी
खगाळी तुही बिव्वड़ा चख्खड़ाई
मुद्राळी तुही आवड़ा मामड़ाई। 67।

धजाळी तुही कर्नला धाबळॅाणी
बडाळी तनै च्यार बेदाॅ बखाॅणी
किसो ओड़ नौ कोड़ तूही कहाई
बिजाई उमा आज तू इन्द्रबाई।68।


थईजै इसा रूप अन्नेक थारा
सको सारदा कै सकै नाॅही सारा
जपूॅ जीह सोभाग मोभाग जागो
लळै आय श्रीमाय रै पाय लागो।69।
अबै बीनती हेक हिंगोळ वाळी
जिका ध्यान दै काॅन कीजै धजाळी 
लहैरी महैराॅण भूपाळ लच्छो
अखो दूसरो रीझ खीजाळ अच्छो।70।

कलब्रच्छ म्हाराज रा सेवकाॅ को
बण्यों राखिजै बूडसू भूप बाॅको
बळे हूं लुळे रावळा पांव बन्दू 
अड़ी नाव ऊबारबा आव इन्दू ।71।

लंकाळै चढे़ चाल जंघाळ लेलै
हली राजड़ा ज्यों प्रथीराज हेलै
हरी पोकरी रै हुवो जेम व्हीजै
कवी पात री मात ऊबेल कीजै। 72।


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देवियांण, भक्त कवि ईसरदासजी बारठ, भाद्रेस, बाड़मेर








देवियांण वीडियो 





छन्द- अडल
करता हरता श्रीं ह्नोंकारी
काली कालरयण कौमारी
ससिसेखरा सिथेसर नारी
जग नीमवण जयो जडधारी।1।


धवा धवळगर धव धू धवळा
क्रसना कुबजा कचत्री कमळा
चलाचला चामुंडा चपला
विकटाविकट भू बाला विमला ।2। 



सुभगा सिवा जया श्री अंबा
परिया परंमार पालंबा
पिसाचणि साकणि प्रतिबंबा
अथ आराधिजे अवलंबा।3।


सं कालिका सारदा समया
त्रिपुरा तारणि तारा त्रनया
ओहं सोहं अखया अभया
आई अजया विजया उमया ।4।


छंद भुजंगी



देवी उम्मया खम्मया ईसनारी, देवी धारणी मुंड त्रिभुवन्नधारी, देवी सब्बदां रूप ओम रूप सीमा, देवी वेद पारक्ख धरणी ब्रहम्मा । 1।

देवी कालिका मां नमो भद्रकाली, देवी दूरगा लाघवं चारिताली, देवी दानवा काल सुरपाल देवी, देवी साधकं चारणं सिद्ध सेवी ।2।

देवी जख्खणी भख्खणी देव जोगी, देवी निर्मला भोज भोगी निरोगी, देवी मात जानेसुरी व्रन्न मेहा, देवी देव चामुंड संख्याति देहा ।3।

देवी भंजणी दैत सेना समेता, देवी नेतना तप्पना जय नेता, देवी कालिका कूबजा कामकामा, देवी रेणुका सम्मला रामरामा ।4।

देव मालळी जोगणी मत्त मेघा, देवी वेधणी सूर असुरां उवेधा, देवी कामही लोचना हामकामा, देवी वासनी मेर माहेस वामा । 5।

देवी भूतड़ा अम्मरी वीस भुजा, देवी त्रीपुरा भैरवी रूप तूजा, देवी राखसं धोम रे रक्त रूती, देवी दुज्र्जटा विक्कटा जम्मदूती । 6।

देवी गौर रूपा अखां नव्व निद्धी, देवी सक्कळा अक्कळा स्रव्व सिद्धी, देवी व्रज्ज विमोहणी वोम वाणी, देवी तोतला गंूगला कत्तियांणी । 7।

देवी चन्द्रघ्ज्ञंटा महम्माय चंडी, देवी वीहळा अन्नळा वाड्डवडडी, देवी जम्मघंटा वदीजंै जडंबा, देवी साकणी डाकणी रूढ सब्बा । 8।

देवी कट्टकां हाकणी वीर कंवरी, देवी मात वागेसरी महागवरी, देवी दंडणी देवबैरी उदंडा, देवी विज्जया जया दैतां विखंडा । 9।

देवी खेचरी भूचरी भद्र खेमा, देवी पद्मणी सोेभणी कलह प्रेमा, देवी जम्मणी मक्ख आहूति ज्वाला, देवी वाहिनी मन्त्र लीला विसाला ।10।

देवी मंगळा वीजळा रूप मघ्धे, देवी अब्बला सब्बला वोम अघ्धे, देवी स्रग्ंग सूं ऊतरी सिव माथे, देवी सगर सुत हेत भगिरथ्थ साथे।11!

देवी हारणी पाप श्री हरि रूपा, देवी पावनी पतितां तीर्थ भूपा, देवी पुन्य रूपं देवी प्रम्म रूपं, देवी क्रम्म रूपं देवी ध्रम्म रूपं ।12।

देवी नीर देख्यां अघ ओघ नासे, देवी आतमानंद हिये हुलासे, देवी देवता स्रब्ब तूं मां निवासे, देवी सेवते सिव सारूप् भासे।13।

देवी नाम भागीरथी नाम गंगा, देवी गंडकी गोगरा रामगंगा, देवी सर्सति जम्मनां सहरी सिद्धा, देवी त्रिवेणी त्रिस्थली ताप रूद्धा ।14।

देवी सिन्धु गोदावरी मही संगा, देवी गोमति घम्मला बाणगंगा, देवी नर्मदा सारजू सदा नीरा, देवी गल्लका तुंगभद्रा गंभीरा।15।

देवी कावेरी तपि करना कपीला, देवी सोण सतलज्ज भीमा सुसीला, देवी गोमगंगा देवी वोमगंगा, देवी गुप्तगंगा सुची रूप अंगा।16।

देवी निझरण नवे सो पदी नाला, देवी तोय ते तवां रूपं तुहाला, देवी मथुरा माईया मोक्षदाता, देवी अवंती अजोध्या अघ्घहाता ।17।

देवी कहां द्वारामती कांचि कासी, देवी सातपुरील परम्मा निवासी, देवी रंग रंगे आप रूपे, देवी घृत नैवेद ले दीप धूपे ।18।

देवी रग्त बंबाळ गळमाळ रूंडा, देवी मढ पाहारणी चंड मंुडा, देवी भाव स्वादे हसंते वकत्रे, देवी पाणपाणां पिये मद्य पत्रंे।19।

देवी सहस्रं लखं कोटीक साथे, देवी मंडणी जुद्ध मैखास माथे, देवी चापडे़ चंड ने मुंड चीना, देवी देवद्रोही दुहू धमी दीना।20!

देवी धूमलोचन्न हूंकार धोंस्यो, देवी जाडबा में रग्तबीज सोस्यो, देवी मोड़ियो माथ निसंभ मोड़े, देवी फोड़ियो संुभ जीं कुंभ फोडे़।21।

देवी संुभ निसंुभ दर्पान छळिया, देवी देव स्रग थापिया दैत दळिया, देवी संघ सूरांतणां काज सीधा, देवी क्रोड़ तेतस उच्छाह कीधा।22।

देवी गाजता दैत ता वंस गमिया, देवी नवे खंड त्रिभुवन तूझ नमिया, देवी वन्न में समाधी सरथ व्रन्नी, देवी पूजते आसपूर्णा प्रसन्नी ।23।

देवी वैस सुरथ्थ रा दीह वळिया, देवी तवन तोरा कियां सोक टळिया, देवी मारकण्डे महापाठ बांध्यो, देवी लगो तव पाय नो पार लाध्यो ।24।

देवी सप्तमी अटमी नो नूजा, देवी चैथ चैदस्स पूनम्म पूजा, देवी सर्सती लक्खमी महाकाळी, देवी कन्न विष्णु ब्रहम्मा कमाळी ।25।

देवी रघ्ग्त नीलमंणी सीत रंगं, देवी रूप अंबार विरूप् अंगं, देवी बाळ युवा व्रधं वेषवाळी, देवी विस्व रखवाळ वीसां भुजाळी ।26।

देवी वैस्णवी महेसी ब्रहम्माणी, देवी इन्द्राणी चन्द्राणी रनांरांणी, देवी नारसिंघी वराही विख्याता, देवी इला आधार आसूर हाता ।27।

देवी कौमारी चामुंडा विजैकारी, देवी कुबेरी भैरवी क्षेमकारी, देवी मृगेंस ब्रख्ख हस्ती मइखे, देवी पंख केकी गरूड़ धिरट पंखे ।28।

देवी रथ्थ रेवंत सारंग राजे, देवी विमाणं पालखी पीठ व्राजे, देवी प्रेत आरूढ पù, देवी सागरं सुमेरू गूढ सù ।29।

देवी वाहनं नाम कै वप्पवाळी, देवी खग्ग सूळधरा खप्पराळी, देवी कोप रे रूप मे काळजेता, देवी कृपा रे रूप् माता जणेता ।30।

देवी जग्त कत्र्ता र भत्र्ता संहरता, देवी चराचर जग्ग सब मे विचरता, देवी चार धामं स्थल अस्ट साठे, देवी पाविये एकसो पीठ आठे।31।

देवी माइ हिंगोळ पच्छम माता, देवी देव देवाधि वरदान दाता, देवी गन्द्रपांवास अर्बद्द् गा्रमे, देवी थाण उडियाण समसाण ठामे ।32।

देवी गढ़े कोटे गरन्नार गोखे, देव सिन्धु वेला सवालाख सोखे, देवी कामरू पीठ अघ्घोर कुंडे, देवी खंखरे दु्रमे कस्मेर खण्डे ।33।

देवी उत्तरा जोगणीपर उजेणी, देवी भाल भरूअच्च भजनेर भेणी, देवी देव जालंधरी सप्त दीपे, देवी कंदरे सख्खरे वाव कूपे। 34।

देवी मेटलीमाळ घूमे गरब्बे, देवी काछ कन्नोज आसाम अंबे, देवी सब्ब खंडे रसा गीरिश्रंगे, देव वंकड़े दुर्गमे ठां विहंगे ।35।

देवी वम्मेर डंगरे रन्न वन्ने, देव थंबड़े लींबड़े थन्न थन्ने, देव झंगरे चाचरे झब्ब झब्बे, देवी अंबरे अंतरीखे अलंबे ।36।

देवी निर्झरे तरवेर नगे नेसे, देव दिसे अवदिसे देसे विदेसे, देवी सागरं बेठड़े आप संगे, देवी देहरे घरे देवी दुरंगे ।37।

देव सांगर सीप मे अमी श्रावे, देवी पीठ तव कोटि पच्चास पावे, देवी वेलसा रूप् सांमद बाजे, देव बादळा रूप् गैणाग गाजे ।38।

देव मंगगळारूप तूं ज्वाळ माळा, देवी कंठळा रूप् तूं मेघ काळा, देवी अन्नलं रूप आकास भम्मे, देवी मानवां रूप् म्रतलोक रम्मे ।39।

देव पन्नगां रूप पाताळ पेसे, देवी देवता रूप तूं स्रग्ग देसे, देव प्रम्म रे रूप् पिंड पिंड पीणी, देवी सून रे रूप ब्रहाण्ड लीणी ।40।

देवी आताम रूप काया चलावे, देवी काया रे रूप आतम खिलावे, देव रूप वासन्त रे वन्न राजे, देव आग रे रूप तूं वन्न दाझे ।41।

देवी नीर रे रूप तूं आग ठारे, देवी तेज रे रूप तूं नीर हारे, देवी ज्ञान रे रूप तूं जग्त व्यापी, देवी जग्त रे रूप तूं धर्म थापी ।42।

देवी धर्म रे रूप सिव सक्ति जाया, देवी सिव सक्ति रूपे सत्त माया, देवी सत्त रे रूप तूं सेस मांही, देवी सेस रे रूप रे सिर धरा साही।43।

देवी धरा रे रूप खमया कहावे, देवी खम्मया रूप तूं काळ खावे, देवी काळ रे रूप उदंड वाये, देवी वायु जळ रूप कल्पान्त थाये।44।

देवी कल्प रे रूप कल्पान्त दीपे, देवी विष्णु रे रूप कल्पान्त जीपे, देवी नींद रे रूप चख विसन रूढी, देवी विसन रे रूप तंू नाम पूढी।45।

देवी नाभ रे कमळ ब्रळा निपाया, देवी ब्रह्म रे रूप मधुकीट जाया, देवी रूप मधुकीट ब्रह्म डराये, देवी ब्रह्म रे रूप विष्णु जगाये।46।

देवी विष्णु रे रूप जंघा वधारे, देवी मुकंुद रे रूप मधुकीट मारे, देवी सावित्री गायत्री प्रम्म ब्रम्मा, देवी साच तण मेलिया जोग सम्मा।47।

देवी सूनी रे दूध तें खीर रांधी, देवी मरकंड रूप तें भ्रांत बांधी, देवी मन्त्र मूलं देवी बीज बाला, देवी वापणी स्रब्ब लीला विसाला।48।

देवी आद अन्नाद ओंकार वाणी, देवी हेक हंकार ह्नींकार जाणी, देवी आप ही आप आपंा उपाया, देवी जोगनिद्रा भवं तीन जाया ।49।

देवी मन्नछा माइया जग्ग माता, देवी ब्रम्म गोविंद संभु विधाता, देवी सिद्धि रे रूप नव नाथ साथे, देवी रिद्धि रे रूप धनराज हाथे।50।

देवी वेद रे रूप तंू ब्रम्म वाणी, देवी जोग रे रूप मछन्द्र जाणी, देवी दान रे रूप बळराव दीधी, देवी सत्त रे रूप हरचन्द सीधी।51।

देवी रढ्ढ रे रूप दसकंध रूठी, देवी सील रे रूप सौमित्र तूठी, देवी सारदा रूप पींगल प्रसन्नी, देवी मांण रे रूप दुजोंण मन्नी। 52।

देवी गदा रे रूप भुज भीम साई, देवी साच रे रूप् जुहिठल्ल ध्याई, देवी कुन्ती रे रूप तें कर्ण कीधा, देवी सासत्रां रूप सैदेव सीधा।53।

देवी बांण रे रूप अर्जुण बन्नी, देवी द्रौपदी रूप पांचां पतन्नी, देवी पांच ही पांडवां परे तूठी, देवी पांडवी कौरवां परे रूठी।54।

देवी पांडवां कौरवां रूप बांधा, देवी कौरवां भीम रे रूप खाधा, देवी अर्जुणं रूप जैद्रथ्थ मार्यो, देवी जैद्रथ्थ रूप सौभद्र टार्यो ।55।

देवी रेणुका रूप तें राम जाया, देवी राम रे रूप खत्री खपाया, देवी खत्रियां रूप दुजराम जीता, देवी रूप दुजराम रे रग्त पीता।56।

देवी रग्त रे रूप तूं जग्त जाता, देवी जोगणी रूप तूं जग्त माता, देवी मात रे रूप तूं अमी श्रावे, देवी बाळ रे रूप तूं खीर धावं।57।

देवी जस्सुदा रूप कान्ह दुलारे, देवी कान्हा रे रूप तूं कंस मारे, देवी चामुंडा रूप खेतल हुलावे, देवी खेतला रूप नारी खिलावे । 58।

देवी नारि रे रूप पुरसां धुतारी, देवी पुरसां रूप नारी पियारी, देवी रोहणी रूप तंू सोम भावंे, देवी सोम रे रूप तूं सुधा श्रावे ।59।

देवी रूकमणी रूप तूं कान्ह सोहे, देवी कान्ह रे रूप तूं गोपि मोहे, देवी सीत रे रूप तंू राम साथे, देवी राम रे रूप तूं भग्त हाथे।60।

देवी सावित्री रूप ब्रùा सोहाणी, देवी ब्रù रे रूप तूं निगम वाणी, देवी गोरजा रूप तंू रूद्र राता, देवी रूद्र रे रूप तंू जोग धाता । 61।

देवी जोग रे रूप गोरख्ख जागे, देवी गोरखं रूप माया न लागे, देवी माइया रूप तें विष्णु बांधा, देवी विष्णु रे रूप तंे दैत खाधा। 62।

देवी दैत रे रूप तंें देव ग्रहिया, देवी देव रे रूप कै दनुज दहिया, देवी मच्छ रे रूप तूं संख मारी, देवी संखवा रूपा तूं वेद हारी। 63।

देवी वेद सुद वार रूपे कराया, देवी चारणं वेद तें वार पाया, देवी लक्खमी रूप तें भेद दीधा, देवी राम रे रूप तंे रतन लीधा। 64।

देवी दसरथं रूप श्रवणं विडारी, देवी श्रवणं रूप पितु मात तारी, देवी केकयी रूप तें कूड़ कीधा, देवी राम रे रूप वनवास लीधा। 65।

देवी मृग्ग रे रूप तें सीत मोई, देवी राम रे रूप पाराध होई, देवी बाण रे रूप मारीच मारी, देवी मार मारीच लखणं पुकारी।66।

देवी लख्खणं राम पीछे पठाई, देवी रावणं रूप सीता हराई, देवी सक्रारी रूप हनमंत ढाळी, देवी रूप हनमंत लंका प्रजाळी।67।

देवी सांग रे रूप लखणं विभाडे, देवी लक्खणं रूप घननाद पाडे, देवी खगेस रूप तें नाग खाधा, देवी नाग रे रूप हरसेन बाधा ।68।

देवी छकारा रूप तंे राम छळिया, देवी राम रे रूप दसकंध दळिया, देवी कान्ह रे रूप गिरि नक्ख चाडे, देवी नक्ख रे रूप ह्रणकंस फाडे ।69।

देवी नाहरं रूप ह्रणकंस खाया, देवी रूप ह्रणकंस इन्द्रं हराया, देवी इन्द्र रे रूप तूं जग्ग तूठी, देवी जग्ग रे रूप तूं अन्न बूठी।70।

देवी रूप हैग्रीव रे निगम सूस्या, देवी हैग्रीव रूप हैग्रीव धूस्या, देवी राहु रे रूप तें अमी हरिया, देवी विष्णु रे रूप तें चक्र फरिया।71।

देवी संकर रूप त्रीपूर वीधा, देवी त्रीपुरं रूप त्रीपुर लीधा, देवी ग्राह रे रूप तें गज्ज ग्राया, देवी गज्ज गोविन्द रूपे छुडाया । 72।

देवी दधीची रूप तें हाड दीधो, देवी हाड रो तख्ख तें वज्र कीधे, देवी वज्र रे रूप तें व्रत्र नास्यो, देवी व्रत्र रे रूप तें सक्र त्रास्यो।73।

देवी नारदं रूप तें प्रस्न नाख्या, देवी हंस रे रूप तत ज्ञान भाख्या, देवी ज्ञान रे रूप तूं गहन गीता, देवी कृष्ण रे रूप गीता कथीता ।74।

देवी बालमिक व्यास रूपे तूं कृतं, देवी रामायण पुराणे भागवतं, देवी काबा रे रूप तूं पाथ लूटे, देवी पाथ रे रूप भाराथ जूटे । 75।

देवी रूप अंधेर रे सूर गंजे, देवी सूरजं रूप अंधेर भंजे, देवी मैख रे रूप देवां डरावे, देवी देवता रूप तूं मैख खावे ।76।

देवी तीर्थ रे रूप अघ विषम टारे, देवी ईस्वरं रूप अधमं उधारे, देवी पौन रे रूप तूं गरूड़ पाडे, देवी गरूड़ रे रूप चत्रभूज चाडे। 77।

देवी माणसर रूप मुगता निपावे, देवी मरालं रूप मुगता तुं पावे, देवी वामणं रूप बळराव भाड़ंे, देवी रूप बळराव मेरू उपाडे़।78।

देवी मेरगिर रूप सायर वरोळे, देवी सायरं रूप गिरमेर बोळे, देवी कूर्म रे रूप तूं मेर पूठी, देवी वाडवा रूप तूं आग उठी ।79।

देवी आग रे रूप सुर असुर डरिया, देवी सरसती रूप तें तेथ धरिया, देवी घड़ा रे रूप अगसत्त दीधो, देवी अगस्तं रूप सामन्द पीधो। 80।

देवी समुदं्र रूप तंे हेम छळिया, देवी पांडवं हेम रे रूप गळिया, देवी पांडवां रूप तें भ्रांत भांगी, देवी भ्रांत रे रूप तूं राम लागी ।81।

देवी राम रे रूप तंू भगत तूठी, देवी भगत रे रूप वैकुंठ वूठी, देवी रूप बैकुंठ परब्रह्म वासी, देवी रूप परब्रह्म सब मे निवासी।82।

देवी ब्रह्म तूं विष्णु अज रूद्रराणी, देवी वाण तंू खाण तूं भूत प्राणी, देवी मन्नं तंू पवन तंू मोख माया, देवी क्रम्म तूं ध्रम्म तूं जीव काया ।83।

देवी नाद तूं बिन्दु तूं नव्व नि़ि़द्ध, देवी सीव तूं सक्ति तूं स्रब्ब सिद्धी, देवी बापड़ा मानवी कांई बूझे, देवी ताहरा पार तूं हीज सूझे । 84।

देवी तूंज जाणे गती गहन तोरी, देवी तत्त रूपं गती तंूज मोरी, देवी रोग भव हारणी त्राहि मामं, देवी पाहि पाहि देवी पाहि मामं । 85।
छप्पय

रगता सेता रणा, नमो मां क्रसना नीला
सीकोतरी आसुरी, सुरी सुसिला गरवीला
दीरघा लघु वपु द्रढा, सबेही रूप विरूपा
वकला सकला व्रजा, उपावण आप आपुण
घण पवण हुतासण सूं प्रबळ, चामुंडा वन्दू चरण
कवि पार तूझ ईसर कहें, कालीका जाणे कवण ।1।


घम घमंत घुघरी, पाय नेवरी रणंझण
डम डमंत डाकली, ताल ताळी बज्जे तण
पाय सिंघ गळ अड़े, चक्र झळहळे चउदह
मळे क्रोड तेतीस, उदो सुरियंद अणंदह
अदभूत रूप सकती अकळ, प्रंेत दूत पालतियं
गहगहे वार डमरू डहक, महंमाय आवतियं ।2।


चढे़ सिंघ चामुंड, कमळ हंूकारव कध्धो
डरो चरंतो देख, असुर भागियो अवध्धो
आदि सक्ति आपडे, रूक वाहिये रमंता
खाळ रगत खळहळे, ढळे ढींगोळ धरंता
हींगोळराय अठ दस हथी, भ्रखे मैख भुवनेसरी
कवि जोड़ पाण ईसर कहे, उदो उदो आसपुरी।3।